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छत्तीसगढ़

धान खरीदी में अव्यवस्था का आरोप, विपक्ष ने सरकार को कटघरे में किया खड़ा

छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से प्रारंभ होकर 19 दिसंबर 2025 तक चलेगा। सत्र के दूसरे दिन धान खरीदी को लेकर सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया। विपक्ष ने इसे किसानों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताते हुए सरकार पर गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था के आरोप लगाए।

शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने धान खरीदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में किसान अब तक पंजीयन से वंचित हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन नहीं हो सका है, जबकि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों को भी इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। महंत ने कहा कि टोकन समय पर नहीं मिलने और भुगतान में देरी के कारण किसान भारी मानसिक तनाव में हैं, जिसके गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ रहे हैं।

इस पर सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष पर तंज कसते हुए बयान दिया, जिससे सदन में और तीखी बहस शुरू हो गई। जवाब में डॉ. महंत ने स्पष्ट किया कि धान खरीदी की अव्यवस्था एक जमीनी सच्चाई है और विपक्ष इस विषय को पूरी गंभीरता से उठा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने धान खरीदी से जुड़े स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि यह विषय सीधे तौर पर किसानों और आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर सदन में विस्तृत चर्चा आवश्यक है।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार की मंशा धान खरीदी को लेकर स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों का रकबा घटता जा रहा है, तकनीकी खामियों के कारण पोर्टल बार-बार बंद हो जाता है और नेटवर्क की समस्या से किसान परेशान हैं। बघेल ने दावा किया कि प्रदेश भर में किसान अपनी फसल बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं।

धान खरीदी के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच हुई इस तीखी बहस ने शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विधानसभा की कार्यवाही को पूरी तरह से केंद्र में ला दिया।

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